जिया की आंखों में आज आंसू थे। क्या कहेंगे उसे.. हर्ष के आंसू या उदासी के थे..वो तो स्वयं जिया भी तय नहीं कर पाएगी। सा…
बैठ पिता के कांधों पर इठलाने को मन करता है। मेले के खेल खिलौनों को घर लाने को मन करता है। पिता अगर फिर से मिल जाएं उन्ह…
पिछले कई दिनों से वही गीत है जहन में जो तुम थी गुनगुनाती वो संगीत है जहन में जिसे सुनकर आज भी मैं हूँ ज़िन्दगी से …
चीनी से भी ज्यादा गुड़ को, मंहगा होते देखा है। घड़ियाली आंसू वाले, एक ठग को रोते देखा है।। बेहद हल्के गहने भी अब, नहीं ग…
हसरतें है मेरी भी कुछ मैं भी एक जान हूं जिम्मेदारी के बोझ तले दबा हुआ मैं भी एक इंसान हूं भूल गया हूं अपनी ख्वाहिशे…
हिन्दुत्व में है जान बता क्यों नहीं देते, इससे भला है सबका जता क्यों नहीं देते। लोहा हैं मानते सभी हिन्दुत्व का जग में…
जल ही जीवन है जीवों का, बूंद बूंद हर मोती है। हर एक पौधा कल्पवृक्ष, हर फल संजीवनि बूटी है।। पर्यावरण सुरक्षित कर लो ,स…
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