घर की लक्ष्मी बनकर आई थी स्मिता, अब मेरे बच्चे की दुनिया बन गई है। सुरेन्द्र की हमसफ़र बनकर आयी थी, आज मेरे बच्चे…
‘‘किससे पूछूं कि कहां गुम हूं कई बरसों से। हर जगह ढूंढता फिरता है, मुझे मेरा घर।।’’ ये पंक्तियां शेरो-शायरी की किसी पुस…
घर की लक्ष्मी बनकर आई थी स्मिता, अब मेरे बच्चे की दुनिया बन गई है। सुरेन्द्र की हमसफ़र बनकर आयी थी, आज मेरे बच्चे…
पृथ्वी का हाल देखकर हमारे मन में यह विचार आता है कि हमारी धरोहरें जो हमारे पूर्वजों ने हमे सौंपी थी हमने उनका अस्तित्व …
नील गगन में आता सूरज, चंदा से बतियाता सूरज। चमके पूरा दिन शिद्दत से, थक के फ़िर सो जाता सूरज। सर्दी में दिखता है कम ही,…
तुमने बंजर ज़मीन में खूबसूरत सा फुलवारी बना दिया है, क्या ही किया ? तुमने मकानों को घर बना दिया, क्या ही किया ? तुमने…
कभी-कभी ज़िंदगी के सबसे गहरे दर्द उन शब्दों के पीछे छिपे होते हैं, जो सुनने में सबसे सामान्य लगते हैं— “सब ठीक है।” यह …
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