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  मासी, बस यहीं खड़े रहते हैं ना-रेणु बाला
  एक मज़दूर, एक ममता-ज्योति वर्णवाल
अस्तित्व-निशाअतुल्य
 छवि चिन्तन-ममता गिनोड़िया
 अंततः - डॉ मधु खंडेलवाल
विश्व एथलेटिक्स दिवस -ज्योति सिंह
चित्र पर लघुकथा- नमिता दुबे मिशा
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