शब्द को ब्रह्म कहा गया है । शब्द केवल ध्वनि नहीं रहे, वे मनुष्य की नियति लिखने लगे। सत्ता ने तलवार से पहले शब्दों पर…
क्या श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सच में मुस्लिम लीग के साथ सरकार बनाई थी? सोशल मीडिया के दावों और इतिहास के पन्नों का एक न…
विवेक रंजन श्रीवास्तव १. मंगलाचरण जग के नाथ जगन्नाथ, भक्तों के आधार। रथयात्रा का पर्व यह, मंगलमय त्योहार॥ २. कठोपनिषद्…
जया उच्च शिक्षित, व संभ्रांत परिवार की लड़की थी। उसका विवाह कम पढ़े लिखे लड़के से ,एक अशिक्षित परिवार में हुआ।शादी के प…
हम मूकों की भाषा लिखते निःस्वादों के स्वाद परखते हम बरखा का रुदन देखते प्रकृति का प्रस्फुटन लेखते। भाव अभ्युदय अभिलाषी …
महाकवि कालिदास का यह अमर वचन मानव जीवन का शाश्वत सत्य है। इसका अर्थ है—यह शरीर ही समस्त कर्तव्यों, पुरुषार्थों और जीवन-…
*साहित्य सरोज पत्रिका का साप्ताहिक लेखन प्रतियोगिता '01* अनुभव तिवारी दो कदम तुम भी चलो दो कदम हम भी बढे गुनगुना ल…
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