साहित्‍य सरोज के साथ मन की बात- शिल्‍पा

मन की बात- साप्‍ताहिक आयोजन



यूं तो मन में ढेरों बातें प्रतिदिन प्रति मिनट प्रति सेकंड चलती ही रहती हैं मन तो हमारा एक चंचल पतंग की बनती है जो कभी करता ही नहीं मन को काबू पाना बहुत ही कठिन काम है। हम कितना ही प्राणायाम कर ले या मेडिटेशन कर ले मन को मुट्ठी में करताना नामुमकिन है अगर कुछ देर के लिए मन को पकड़ भी ले तो यह 1 मिनट ही ठहरता है और फिर ना जाने कहां पंख लगा कर बिना टिकट के पूरी दुनिया घूम आता है हो जाता है। मेरे मन में भी ढेरों विचार आते और जाते रहते हैं कि जीवन तो यूं ही निकल रहा है कुछ काम अपने जा अपने समाज के लिए मुझे करना चाहिए मगर यह क्या बहुत समय से सोच रही हूं लेख लिखने का बहुत पुराना शौक है मेरा मगर कोई स्थाई मंच नहीं मिल रहा था। जहां से मैं अपने मन की बात साझा करूं और कोई बड़े प्यार से उसे पढ़े सराहे और मैं और आगे बढ़ू और कोई बांह पसारे आपका लगाकर स्वागत करता रहे। मगर मुझे मिला प्यार भरा साथ सरोज साहित्य का जैसे एक मां अपना आंचल फैलाए रखती है तब तक जब तक की बच्चा दौड़ कर मां की गोद में ना समा ना जाए। और मेरे मन की बात पूरी हुई मैं धन्यवाद देती हूं सरोज साहित्य को कि आज में और बेहतर लिख पा रही हूं ।
हार्दिक आभार
शिल्पा अरोड़ा
विदिशा मध्‍यप्रदेश
05 अप्रैल 2020 को महिला उत्‍थान दिवस पर आयो‍जित
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