एक अध्यापिका और कोरोना काल-डा. अंजु लता सिंह

वर्ष 3 अंक 1 जनवरी से मार्च 2021
अध्यापन एक पावन,सुखद,परिश्रजन्य और बौद्धिक चेतना से युक्त कार्य है.कबीर ने तो सदियों पहले ही गुरू गरिमा को सर्वमान्य मान ही लिया था.-"गुरू गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।  बलिहारी गुरूआपने गोविंद दियो बताय।"मैंने अपने पैंतीस वर्ष के अध्यापन कार्यानुभव के दौरान जीवन में बेहतरीन,मार्मिक,प्रेरक और ग्रहण करने योग्य संस्मरण संजोए हैं, जो बेशकीमती हैं.सेवानिवृत्ति के बाद मैंने अपनी इसी अनवरत ज्ञानपिपासा को लेकर पुनः एक समाजसेवी संस्था "प्रतिभा विकास मिशन" के नाम से खोली है ,जिसका लक्ष्य जरूरतमंद बेटियों को शिक्षा  सहित अनेक कला-कौशल सिखाना है.।
सन्2018 से ही मैंने आसपास की बस्तियों से बालिकाओं को एकत्र करके "मस्ती की पाठशाला" का आगाज किया,लेकिन कोरोना से पूर्व  जितना त्वरित गति से काम हुआ कोरोना-काल के पैर पसारने के बाद से ही कुछ मंथरता आ गई  है.कारण रहा गरीब बालिकाओं के परिवारों का न्यून आर्थिक स्तर होना.फिर भी मशीन पर सूती कपड़ों से मैंने  काफी संख्या में  मास्क बनाकर और बनवाकर गरीबों में  बांटे.मोबाइल जानने वाली बालिकाओं को ऑनलाइन  शिक्षा देती हूँ.मास्क और सैनेटाइजर का प्रयोग करते हुए रंगोली सजाकर, मेंहदी लगाकर बच्चियों को क्रमशः दीपावली ,तीज,शादी और करवा चौथ आदि मौकों पर कोरोना काल में भी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए.औषधीय पौधों की बागवानी सिखाई.ऑनलाइन गाना,बजाना,अभिनय ,ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण देकर सुखद अनुभूति हुई.अंततः यही कहूँगी,कि कोरोना में  भी निरंतर अध्यापन,प्रशिक्षण और परामर्श का काम चलता रहा है,जो मानव जीवन की जीवंतता और गतिशीलता का प्रतीक है.
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डा. अंजु लता सिंह 'प्रियम'
नई दिल्ली-30
फोन नं.9868176767



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